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वर्ष 1980 में आपरेशन फ्लड कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में समन्वित डेंयरी विकास की गतिविधियां संचालित करने के लिए मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटीज अधिनियम 1960 के अंतर्गत मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ सहकारी मर्यादित (वर्तमान में एम.पी.स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लि.) की स्थापना की गई । इसी के साथ आणंद प्रणाली पर त्रि-स्तरीय सहकारी संस्थाओं का गठन प्रारंभ हुआ । इसके अंतर्गत प्रथम स्तर पर लगभग 7000 ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियां, द्वितीय स्तर पर 6 सहकारी दुग्ध संघ जिनके मुख्यालय भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर एवं सागर में हैं तथा राज्य स्तर पर एमपी स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) कार्यरत हैं ।


दुग्ध सहकारी समितियों के कार्य:

  • o दुग्ध उत्पादकों द्वारा उत्पादित दूध के लिए उनके द्वार पर बाजार की उपलब्धता ।
  • o कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार सुविधा उपलब्ध कराना
  • o दुग्ध उत्पादन वृद्धि हेतु उचित मूल्य पर संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराना ।
  • o तकनीकी पशु प्रबंधन प्रशिक्षण ।
  • o उन्नत चारा बीज की उपलब्धता ।
  • o पशु प्रथमोपचार/टीकाकरण सुविधा उपलब्ध कराना
  • o शासन की विभिन्न योजना के क्रियान्वयन का माध्यम ।

दुग्ध संघों के प्रमुख कार्य

  • o ग्रामीण स्तर पर सर्वेक्षण एवं आकलन पश्चात ऐसे ग्राम जहां विपणन योग्य दूध प्रारंभिक संस्था गठन हेतु उपलब्ध है, में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन।
  • o दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के सदस्यों से धृतांश (फैट) एवं अधृतांश (एस.एन.एफ) के आधार पर दूध क्रय, परिवहन, संसाधन, दुग्ध पदार्थ उत्पादन, विपणन आदि की व्यवस्था ।
  • o दुग्ध उत्पादक सदस्यों को मार्गदर्शन एवं सेवाएं उपलब्ध करना
  • o संतुलित पशु आहार, मिनरल मिक्सचर आदि की व्यवस्था जिससे कम से कम लागत में अधिक दुग्ध उत्पादन हो सके तथा दुधारू पशु स्वस्थ रहें।
  • o प्रजातान्त्रिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
  • o दुग्ध संघ स्तर पर दुग्ध समितियों के प्रबंध कारिणी समिति सदस्यों को प्रबंधन, प्रशिक्षण।
  • o दूध एवं दुग्ध पदार्थों का साँची ब्राण्ड नाम से विक्रय ।
  • o एमपीसीडीएफ के माध्यम से केन्द्र /राज्य शासन की विशिष्ट परियोजनाओं का क्रियान्वयन ।

एमपीसीडीएफ के प्रमुख कार्य:

  • o राज्य तथा केन्द्र शासन एवं उनकी एजेंसियों के साथ समन्वय ।
  • o प्रदेश में सहकारी डेयरी कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु योजना तैयार करना तथा उसका अनुश्रवण ।
  • o राज्य तथा केन्द्र शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन ।
  • o दुग्ध संघों को आवश्यक तकनीकी सलाह तथा मार्गदर्शन प्रदान करना ।
  • o दुग्ध संघों को आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न राज्य फेडरेशनों/दुग्ध संघों से आवश्यकतानुसार दुग्ध चूर्ण तथा श्वेत मक्खन उपलब्ध कराना । इसीप्रकार दुग्ध संघों के पास उपलब्ध अतिशेष दुग्ध चूर्ण तथा श्वेत मक्खन के विक्रय की व्यवस्था।
  • o दुग्ध संघों पर प्रशासनिक नियंत्रण ।

उपलब्ध अधोसंरचना

  • o 6 सहकारी दुग्ध संघ
  • o 7145 कार्यरत दुग्ध सहकारी समितियां
  • o 603 बल्क मिल्क कूलर – 9.88 लाख लीटर
  • o 59 दुग्ध शीत केन्द्र – 6.87 लाख लीटर
  • o 6 मुख्य डेयरी संयंत्र – 13.70 लाख लीटर
  • o 10 लघु डेयरी संयंत्र – 2.53 लाख लीटर
  • o 2 दुग्ध चूर्ण संयंत्र - 20 मे. टन
  • o 5 पशु आहार संयंत्र - 550 मे. टन

एमपीसीडीएफ के अंतर्गत सहकारी डेयरी विकास कार्यक्रम का संचालन प्रदेश के समस्त जिलों में किया जा रहा है ।गठित समितियों की सदस्य संख्या 3,38,156 है जिसमें से सामान्य वर्ग के 77,457 अनुसूचित जाति वर्ग के 31,656 अनुसूचित जनजाति वर्ग के 21,909 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,07,134 सदस्य हैं।